ग़ज़ल~ऐ~महफ़िल
गजल
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ग़ज़ल, अरबी और फ़ारसी साहित्य से जन्मी एक छंद बद्ध कविता है जो सातवीं शताब्दी के आरम्भ से चली आ रही है, जहाँ यह एक ही बहर और वज़न के अनुसार लिखे गए शेरों का समूह है। इसमें पहले शेर को मतला और आख़िरी शेर को मक़्ता कहते हैं, जिसमें शायर अपना नाम रखता है। ग़ज़लों की संख्या विषम होती है, आमतौर पर 5 से 25 शेर होते हैं, और हर शेर अपने आप में एक स्वतंत्र कविता होता है।
ग़ज़ल का प्रभाव:
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ग़ज़ल अपने गीतात्मक और भावपूर्ण स्वभाव के कारण जानी जाती है। आधुनिक समय में जगजीत सिंह, चित्रा सिंह, और तलत अज़ीज़ जैसे ग़ज़ल उस्तादों ने इस शैली को लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। आज भी, ग़ज़ल अपनी सूक्ष्म सुंदरता और भावुकता के कारण पाठकों और श्रोताओं को आकर्षित करती है।